शिशु को डकार कैसे दिलाएं?

शिशु को डकार कैसे दिलाएं?

कई बार नवजात शिशु अचानक रोने लगता है जिसके कारण माता-पिता चिंतित होने लगते है, आखिर किस वजह से शिशु रो रहा है? इस परिस्थिति का सबसे अहम कारण है, स्तनपान के दौरान शिशु के पेट में हवा का जाना, जिसके कारण शिशु बेचैन होने लगता है और पेट दर्द से रोने लगता है, तो ऐसी स्थिति में शिशु को आराम कैसे दिलाएं इस केख के माध्यम से यह जानते है कि स्तनपान के दौरान और इसके बाद शिशु को डकार दिलवाने से उसे आरामदेह रहने में कैसे मदद मिल सकती है।

शिशु डकार क्यों लेते हैं?

शिशु का डकार लेना प्यारा तो लगता है, मगर इनका एक मकसद भी होता है। जब आपका शिशु स्तनपान करता है, तो हवा के छोटे-छोटे बुलबुले उसके पेट में फंस सकते हैं। ये बुलबुले उसे असहज और चिड़चिड़ा बना सकते हैं।

शिशु को डकार दिलवाने से आप उसके पेट में जगह खाली करने में मदद करते हैं, ताकि वह शांत हो सके और ज्यादा देर तक स्तनपान कर सके।

डकार आपके शिशु की और भी मदद कर सकती है, यदि:


 

  • वह स्तनपान के बाद अक्सर थोड़ा दूध निकाल देता है
  • उसे उदरशूल (कॉलिक) है
  • उसे रिफ्लक्स है


इसके बावजूद, यह कोई नियम नहीं है कि शिशु को हर बार स्तनपान के बाद डकार दिलवानी ही चाहिए। कुछ शिशु बहुत ज्यादा डकार लेते हैं, वहीं कुछ कभी-कभार ही ऐसा करते हैं।
 

क्या स्तनपान की बजाय बोतल से दूध पीने वाले शिशुओं को ज्यादा डकार दिलवाने की जरुरत होती है?

स्तनपान करने वाले और बोतल से दूध पीने वाले दोनों ही शिशुओं के पेट में गैस फंस सकती है।

हालांकि सामान्यत: स्तनपान करने वाले शिशुओं को बोतल से दूध पीने वाले शिशुओं की तुलना में डकार लेने की जरुरत कम होती है। ऐसा इसलिए क्योंकि स्तनपान के दौरान शिशु कम हवा अंदर लेते हैं।

बहरहाल, यदि शिशु को दूध पिलाते समय आपका दूध बहुत ज्यादा आता है और वह रिसने और स्प्रे की तरह बाहर निकलने लगता है, तो शायद आपको अपने शिशु को ज्यादा बार डकार दिलवाने की जरुरत होगी। हर शिशु अलग होता है, इसलिए अपने शिशु के संकेतों पर ध्यान दें।

 

यदि आप शिशु को बोतल से फॉर्मूला दूध या फिर निकाल हुआ स्तनदूध (एक्सप्रेस्ड ब्रेस्टमिल्क) देती हैं, तो पहले ही सावधानी बरतना अच्छा है। शिशु के पेट में कम हवा जाने का मतलब है कि उसके पेट में कम गैस फंसी होगी और उसे कम डकार दिलवानी होगी।

आप एंटी-कॉलिक बोतल आजमा सकती है। ये इस तरह तैयार की जाती हैं कि ये शिशु को ज्यादा हवा अंदर लेने से रोकती है। इसका मतलब है कि कम हवा अंदर फंसेगी और डकार दिलावाने की जरुरत कम होगी। कुछ माता-पिता कहते हैं कि ये बोतल काफी काम आती है, हालांकि इस बात के कोई प्रमाण नहीं है कि इस तरह की बोतल थोड़ी सस्ती बोतलों की तुलना में अधिक बेहतर है।

सुनिश्चित करें कि बोतल की निप्पल में छेद शिशु के अनुसार सही माप का हो। यदि छेद बहुत बड़ा हुआ तो दूध बहुत जल्दी बाहर आएगा और शिशु आसानी से उसे नहीं निगल सकेगा।

आप शायद पाएंगी कि बोतल से दूध पिलाते वक्त शिशु को सीधे रखना मददगार होता है। यह शायद शिशु को अधिक हवा निगलने से बचाता है।

 

शिशु को डकार कब दिलवानी चाहिए?

शिशु को तभी डकार दिलवाएं जब उसे इसकी जरुरत हो। यदि आपका शिशु संतुष्ट दिखे या फिर स्तनपान के दौरान या बाद में सो जाए, तो उसे डकार दिलवाने की जरुरत नहीं है।

बहरहाल, यदि शिशु स्तनपान के दौरान असहज लगे तो उसे डकार दिलवाने की जरुरत होगी। यदि शिशु बेचैन सा होकर छटपटाने और कसमसाने लगे या फिर स्तन को छोड़ दे और रोना शुरु कर दे, तो आपको पता चल जाएगा कि उसे सहज महसूस नहीं हो रहा। 

 

स्तनपान के दौरान शिशु को एक स्तन से दूध पिलाकर दूसरे स्तन पर लगाने से ठीक पहले डकार दिलवाने का अच्छा मौका होता है। यदि शिशु बोतल से दूध पीता है, तो उसे बीच में रोककर डकार दिलवाई जा सकती है। यदि शिशु चिड़चिड़ा लगे तो दूध पिलाने के बाद भी उसे डकार दिलवा सकती हैं।

चार से छह महीने की उम्र के बीच शिशु इतना बड़ा हो जाता है कि उसे अब दूध पीने के बाद डकार लेने की जरुरत नहीं होती। अब वह और अधिक कुशलता से स्तन चूस रहा होगा और ज्यादा हवा अंदर नहीं गटक रहा होगा।

 

शिशु को डकार कैसे दिलवानी चाहिए?

शिशु को डकार दिलवाने के कई तरीके हैं। आप आजमाकर देखें कि कौन सा तरीका आपके और आपके शिशु के लिए सही रहता है।

शिशु को डकार दिलवाने से पहले मलमल का चोकौर रुमाल या कोई पुराना तौलिया अपने ऊपर लगा लें। ऐसा इसलिए क्योंकि गैस बाहर आने के साथ-साथ कई बार थोड़ा सा दूध भी बाहर आ जाता है। थोड़ा-बहुत दूध निकालना शिशु के लिए एकदम सामान्य बात है।

शिशु को डकार दिलवाने के तीन तरीके नीचे दिए गए हैं:

अपनी छाती पर उल्टा लिटाकर

 

  • शिशु को अपनी छाती से सटाकर इस तरह पकड़े कि उसकी ठोड़ी आपके कंधे पर हो।
  • अपने हाथ से उसके सिर और कंधों को सहारा दें।
  • अपने दूसरे हाथ से शिशु की पीठ को सहलाएं या थपथपाएं।


गोद में बिठाकर
 

  • शिशु को अपनी गोद में इस तरह बिठाएं कि उसका चेहरा आपकी तरफ न होकर सामने की तरफ हो।
  • अपनी एक बाजू से शिशु के शरीर को सहारा दें, आपकी हथेली उसकी छाती को सहारा दे और उंगलियां उसकी ठोड़ी और जबड़े को हल्के से सहारा दें। अपनी उंगलियों को उसके गले से दूर रखें।
  • शिशु को थोड़ा आगे की तरफ झुकाएं और अपने दूसरे खाली हाथ से उसकी पीठ को सहलाएं या थपथपाएं।


गोद में चेहरा नीचे की तरफ करके लिटाएं
 

  • शिशु को अपनी टांगों पर इस तरह लिटाएं की उसका चेहरा नीचे की तरफ हो और वह आपके घुटनों के पार लेटा हो। उसे अपने शरीर के अनुसार सही तरीके से लिटाएं।
  • शिशु की ठोड़ी और जबड़े को अपने एक हाथ से सहारा दें।
  • शिशु के सिर को उसके बाकी शरीर की तुलना में थोड़ा ऊंचा रखें, ताकि खून उसके सिर की तरफ न आए।
  • दूसरे हाथ से शिशु की पीठ सहलाएं या हल्के से थपथपाएंं।


शिशु की पीठ सहलाते या थपथपाते समय उससे बात करें या धीमे स्वर में गाना गुनगुनाएं। आपकी आवाज सुनकर उसे आराम मिलेगा।

यदि कुछ मिनटों के बाद भी आपका शिशु डकार न ले तो शायद इसका मतलब है कि उसे डकार लेने की जरुरत नहीं है। मगर यदि वह स्पष्ट तौर पर असहज दिखे तो प्रयास करती रहें या फिर शिशु को किसी और अवस्था में लेकर कोशिश करें।


 

थपथपाने या सहलाने से फायदा न हो तो क्या करें?

यदि शिशु के पेट में गैस फंसी है और सहलाने या थपथपाने से भी नहीं निकल रही है, तो आप अन्य तरीके आजमा सकती हैं। शिशु को आराम देने के लिए आप उसे हल्के गर्म पानी से नहला सकती हैं। 

इसके बाद उसके पेट पर हल्की मालिश करें। अपने हाथों को शिशु के पेट पर रखें और घड़ी की सुई की दिशा में गोल-गोल घुमाएं। इससे शिशु को आराम भी मिलेगा और साथ ही फंसी गैस भी बाहर निकलने में मदद मिलेगी। शिशु का पाचन बेहतर करने के लिए मालिश कैसे की जाए, यह हमारे इस वीडियो में देखें।

दुर्भाग्यवश, कई बार गैस ऐसे फंसी रह जाती है कि ये सब तरीके भी काम नहीं आते। ऐसे में अपने डॉक्टर से बात करें, वे सिमेतिकोन ओरल ड्रॉप्स लेने की सलाह दे सकते हैं। सिमेतिकोन फंसी हुई गैस को बड़े बुलबुलों में बदल देती है, जिन्हें डकार के जरिये बाहर निकालना शिशु के लिए आसान होता है।

बेहतर है कि डॉक्टर से पूछे बिना शिशु को जड़ी-बूटियों की औषधी या जन्म घुट्टी न दी जाए। इनमें से कुछ में ऐसी सामग्रियां या जड़ी-बूटियां हो सकती हैं जो नन्हें शिशुओं के लिए उचित न हों।