शिशु को आँखों के संक्रमण से कैसे बचाएं!

शिशु को आँखों के संक्रमण से कैसे बचाएं!

आँखे हमारे शरीर का सबसे नाजुक और महत्वपूर्ण अंगों में से एक है। अगर हम आँखों के प्रति थोड़ी सी भी लापरवाही करते है तो वह ताउम्र परेशानी का कारण बन सकता है और बच्चों की आखों की बात करे तो बच्चों की आँखे बहुत ही ज्यादा संवेदनशील होती हैं और बहुत जल्दी ही संक्रमित हो जाती है इसलिए बच्चों की आँखों के लिए हमें अतिरिक्त सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है। इसलिए आपको इस ब्लॉग के माध्यम से बच्चों की आँखों में होने वाले इन्फेक्शन के कारण, लक्षण और उससे बचाव के उपायों के बारे में बता रहे हैं।

आँखों में संक्रमण के कारक कौनसे है ?

अक्सर हम सुनते रहते है आँखों में संक्रमण हो गया है जिसको आई फ्लू के नाम से जाना जाता है परन्तु यह साधारण बीमारी है और ये किसी को भी हो सकती है। यह बैक्टीरिया से फैलने वाली एक संक्रामक बीमारी है जो परिवार में किसी एक सदस्य को हो जाने पर बाकी सदस्यों को अपना शिकार बना सकती है। इस बीमारी से ग्रसित रोगी के इस्तेमाल में लाई जाने वाली वस्तुओं जैसे कि रूमाल, तौलिया, या अन्य किसी दूसरी वस्तुओं के माध्यम से हो सकती है।

क्या नवजात शिशु इस बीमारी का शिकार हो सकता है?

नवजात शिशु के जन्म के शुरूआती दिनों में आँखों में जन्मजात संक्रमण होने की संभावना बनी रहती है जिसे ऑफ्थैलमिया नियोनेटोरम कहा जाता है। यह समस्या शिशु के जन्म के समय से ही हो सकता है। जैसे शिशु की आँखों से लगातार पानी आना, आँखों का चिपकना, आंखों का लाल हो जाना या आँखों में सूजन आना आदि इसके लक्षण हो सकते हैं। जिसकी वजह से शिशु इस बीमारी का शिकार हो सकता है । इसलिए शिशु की आँखों की सफाई का विशेष ध्यान रखने से इस बीमारी से बचा जा सकता है।

आँखों में संक्रमण होने के क्या-क्या लक्षण है?

आँखों में संक्रमण होने के कई प्रकार के लक्षण हो सकते हैं। जो निम्न है-

इन लक्षणों को नजरंदाज नहीं करना चाहिए। अगर इस प्रकार के लक्षण नजर आए तो तत्काल ऑंख के डॉक्टर से संपर्क करें और अपना उपचार शुरू करवाएं।

 

  • आँखों का लाल हो जाना:- वायरल कंजक्टिवाइटिस होने पर आँखों से चिपचिपा तरल पदार्थ निकलता है। जिसके कारण आँखे चिपक जाती है तथा आँखों में जलन और दर्द होने लगता है। सुबह उठते समय रोगी की आँखे चिपकी हुई रहती है तथा तेज धूप में रोगी को अत्यधिक कठिनाई होती है ।
  • आँखों से पानी आना:- आँखों में इन्फेक्शन के कारण पानी आने लगता है जिसके कारण आँखों में खुजली होने लगती है ।
  • आँखों की पलकों पर सफेद परत का जमना:- आँखों से निकलने वाले चिपचिपे पदार्थ के कारण पलकों पर सफेद परत जम जाती है, जिसके प्रभाव से धुंधला दिखाई देने लगता है ।
  • आँखों से खून आना:- आँखों में संक्रमण की वजह से अत्यधिक मात्रा में चिपचिपा पदार्थ निकलता है जिसके कारण आँखों में खुजली और जलन की वजह से आँखों में घाव हो जाता है और खून आने लगता है ।

 

 आँखों में होने वाले संक्रमण के प्रकार:- आँखों के सामने वाले भाग में एक पतली श्लेष्मा झिल्ली होती है जो धूल के कणों या अन्य बाहरी तत्वों से हमारी आँखों को बचाती है जिसमे संक्रमण के कारण इसमें सूजन आ जाती है। आँखों में संक्रमण कई प्रकार के होते हैं:-

 

वायरल कंजक्टिवाइटिस

एलर्जिक कंजक्टिवाइटिस

बैक्टीरियल कंजक्टिवाइटिस

केमिकल कंजक्टिवाइटिस

अगर बच्चे को किसी चीज से एलर्जी है तो उसकी वजह से भी कंजक्टिवाइटिस हो सकता है, जैसे कि साबुन, शैंपू या परफ्यूम से भी संक्रमण हो सकता है। इसके अलावा आंखों में गंदगी का जाना, धूल का जाना या छोटे-मोटे कीट पतंग के प्रवेश कर जाने से भी कंजक्टिवाइटिस हो सकता है। प्रदूषण या गंदे पानी का इस्तेमाल करने से भी इन्फेक्शन हो सकता है। मानसून के समय में यानि बारिश के मौसम में विशेष रूप से एहतियात बरतना चाहिए।

 

आँखों में होने वाले संक्रमण से बचाव के क्या-क्या सावधानी बरतनी चाहिए:-

  • आँखों में होने वाले संक्रमण से बचाव का सबसे अहम तरीका यह है कि जो भी इस बीमारी से पीड़ित है उसके पास जाने से परहेज करे ।
  • संक्रमण से पीड़ित व्यक्ति को चश्मे का प्रयोग करना चाहिए ताकि यह बीमारी दूसरों में न फ़ैल पाए ।
  • स्नान करते समय साफ पानी का प्रयोग करे या फिर उसमे डेटॉल का इस्तेमाल करे ।
  • संक्रमित व्यक्ति की आँखों में दवा डालने के पश्चात हाथों को अच्छी तरह से साबुन से साफ करे ।
  • इस बीमारी का ज्यादा असर हो तो अत्यधिक भीड़ भाड़ वाली जगहों पर जाने से परहेज करे ।
  • अपनी आँखों को बार-बार मसले नही, बार-बार मसलने से आँखों के अंदरूनी हिस्से को नुकसान हो सकता है जिसके कारण गहरा जख्म हो सकता है ।
  • बच्चों को विटामिन ए की खुराक पिलाए ।
  • बच्चे की आँखों में किसी भी प्रकार के काजल नही डाले, काजल नुकसान हो सकता है ।
  • डॉक्टर की परामर्श के बिना किसी भी प्रकार की आई ड्राप का इस्तेमाल नही करे ।

अगर शिशु को किसी भी प्रकार की दिक्कत हो रहीं हैं तो तुरंत अपने शिशु रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेवें। हमारे द्वारा दी गई जानकारी से आप संतुष्ट है तो इसे शेयर करें और आपकी राय कमेंट बॉक्स में जरुर देवें।