प्लॉगिंग क्या है, वर्तमान में इसकी जरुरत क्यों है?

प्लॉगिंग क्या है, वर्तमान में इसकी जरुरत क्यों है?

प्लॉगिंग शब्द जो वर्तमान समय में सबसे ज्यादा चर्चित हो रहा है। इसके बारे में भारत के प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को अपने कार्यक्रम “मन की बात” में प्लॉगिंग की चर्चा की और देशवासियों से 2 अक्टूम्बर गाँधी जयंती के अवसर पर इस इवेंट में बढ़-चढ़ कर भाग लेने की अपील की। आखिर ये प्लॉगिंग क्या है और क्यों चर्चा में है।

प्लॉगिंग क्या है?

प्लॉगिंग शब्द स्वीडिश भाषा के प्लॉके “शब्द” से बना है, जिसका शाब्दिक अर्थ है इकट्ठा करना। सबसे पहले प्लॉगिंग की शुरुआत पर्यावरण एक्टिविस्ट एरिक आह्लस्टार्म नें सन 2016 में की। एरिक आह्लस्टार्म टहलते और दौड़ते समय अपने हाथ में एक थैला रखते और जहाँ भी कचरा दिखा उसे बैग में डालते और आगे बढ़ जाते। उनकी इस पहल को लोगों ने काफी सराहना की और लोग इससे जुड़ते गये तथा धीर-धीरे विश्व के अन्य देशों में यह ट्रेंड चलने लगा कि लोग जॉगिंग के जाते है तो अपने पास एक थैला रखते है और उसमे रास्ते में कहीं पर भी बिखरा हुआ कचरा उठाते और थैले में डाल लेते।

सन 2018 में जर्मन के शहर कोलोन में प्लॉगिंग कोलोन नाम से ग्रुप बना। शुरुआत में इस ग्रुप में सिर्फ दो ही लोग शामिल हुये। एक बैडमिंटन खिलाड़ी कारो कोएलर और दूसरी पत्रकार अनीता हॉर्न, जो कहीं पर भी जाते है तो अपने साथ थैला रखते है जिसमें कचरा डाल लेते थे। वर्तमान में इस ग्रुप में काफी लोग शामिल हो गये, जिनमें पर्यावरणविद, छात्र, महिला और पुरुष शामिल है, पार्क या जंगल में टहलते हुए कचरा साफ करते है।

भारत में प्लॉगिंग को शुरू करने का श्रेय रिपू दमन को जाता है, जो प्रकृति प्रेमी और घूमने का शौकीन है। रिपू जंगल में घुमने जाते और अपने साथ जंगल से कचरा उठाकर ले आते। रिपू ने फेसबुक पेज के माध्यम से लोगों को प्लॉगिंग के लिए प्रेरित किया और धीरे-धीरे कारवां जुड़ता गया। प्रधानमंत्री ने अपने कार्यक्रम में रिपू दमन की काफी प्रशंसा की।

   

प्लॉगिंग का मानव शरीर पर क्या प्रभाव पड़ता है:- जब हम जॉगिंग के लिए जाते है सिर्फ हमारे पैरों की मांसपेशियां की इस्तेमाल होती है लेकिन प्लॉगिंग के दौरान पैरों के अलावा कमर और हाथ का भी इस्तेमाल होता है, जिससे शरीर का संतुलन भी बनता है और हाथ और पैर के जोड़ भी मजबूत होते है, तथा साथ ही मानसिक संतुलन बना रहता है।

आधुनिक युवाओं की दिनचर्या में जिस तरह से बदलाव हो रहा है, वे एकांकी और तनाव का अनुभव कर रहे है। ऐसी परिस्थिति में तनाव से उबरने के लिए प्लॉगिंग  सहायक सिद्ध हो रहा है।

इस ब्लॉग के माध्यम से मैं सभी से प्लॉगिंग शुरू करने की अपील करता हूँ। प्लॉगिंग का उद्देश्य ना सिर्फ कचरा साफ करना है बल्कि हमें प्रकृति से भी जुड़ना  है। हमारी पृथ्वी पर जमा हो रहे कचरे (जो अपघटित नहीं होता है) को प्लॉगिंग से ही हटा सकते है।