सर्दी के मौसम में नवजात शिशु का इस तरह रखें ख्याल!

ठंड में बच्चों के स्वास्थ्य की अत्यधिक देखभाल करना जरुरी होता है। तो आइए इस लेख के माध्यम से बताते है कि अपने नन्हे नौनिहाल का कैसे ख्याल रखें।

सर्दी के मौसम में नवजात शिशु का इस तरह रखें ख्याल!
सर्दी के मौसम में नवजात शिशु का इस तरह रखें ख्याल

भारत में अक्टूबर का महीना शुरू होते ही सर्दी शुरू हो जाती है। गर्मी का मौसम खत्म होते है हल्की गुलाबी ठंड अत्यधिक पसंद भी आती है। लेकिन इस हल्की गुलाबी ठंड का स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, खासतौर से यह ठंड बच्चों को अत्यधिक परेशान करती है, इसलिए बच्चों पर अतिरिक्त ध्यान देने की आवश्यकता होती है। धीरे-धीरे सर्दी अपना प्रचंड रूप दिखाने लगती है जिसके कारण बच्चे सबसे ज्यादा मौसमी बीमारी की चपेट आ जाते है। इसके अलावा निमोनिया, टाइफाइड, पीलिया व अन्य कई प्रकार की दिक्कत बच्चों को ठंड के मौसम में ज्यादा होती है। ऐसे में ठंड में बच्चों के स्वास्थ्य की अत्यधिक देखभाल करना जरुरी होता है। तो आइए इस लेख के माध्यम से बताते है कि अपने नन्हे नौनिहाल का कैसे ख्याल रखें।

सर्दी के मौसम में अपने शिशु का ख्याल आप इस प्रकार रख सकते है:-

ठीक और अच्छी तरह से कपड़े पहनायें:- शिशु को सर्दी के मौसम में अच्छे और सुव्यवस्थित तरीके से कपड़े पहनायें अत्यधिक कपड़े पहनाने की बजाय शिशु को कपड़े लेयर में पहनाये जाते है तो ज्यादा प्रभावशाली रहेंगे। शिशु को शरीर के स्पर्श करते हुए सूती कपड़ा पहनायें, इसके ऊपर आप ऊनी कपड़े पहना सकते हो। ऐसा करने से शिशु के शरीर का तापमान सामान्य बना रहेगा।

हाथ और पैरों में ऊनी वस्त्र पहनायें:- सर्दी के मौसम में शिशु को पैरों में कॉटन की जगह ऊनी जुराब पहनायें, तथा हाथों में ऊनी दस्ताने का उपयोग करें।  जो बच्चा घुटनों के बल चलता है उसके हाथ और पैर आवश्यक तौर से कवर करें।   

बच्चे की साफ-सफाई जरुर करें:- अगर शिशु की उम्र महीने से कम है तो सप्ताह में दो से तीन बार अवश्य नहलाना चाहिए और रोजाना साफ और गुनगुने पानी में साफ रुई या तौलिए को भिगोकर शरीर को साफ करें। अगर आप शिशु को हमेशा नहलायेंगे तो कीटाणुओं की चपेट में नहीं आएगा।  

स्तनपान अवश्य करवायें:- शिशु की उम्र 6 महीने से कम है तो समय-समय स्तनपान करवाते रहें और शिशु की उम्र 6 महीने से अधिक है तो स्तनपान के फ़ॉर्मूला मिल्क भी देते रहे ताकि शिशु की आवश्यकता की पूर्ति होती रहें। शिशु की उम्र 1 साल से अधिक है तो उसे इस प्रकार की खाद्य वस्तु दे जिसे वो आसानी से निगल सकें और गले में अटकने का डर नहीं रहें। ड्राई फ्रूट से किसी प्रकार की एलर्जी है तो उसे बिलकुल ना देवें। इसके अलावा आप शिशु को सेब, संतरा, चीकू और अनार जैसे फल दे सकते हों।    

धूप में रखें:- सर्दी के मौसम में शिशु को धूप में जरुर घुमायें।  धूप से विटामिन डी प्राप्त होता है, इसलिए दिन में शिशु को कम से कम आधा घंटे धूप में जरुर बैठाना चाहिएं। धूप में घुमाते समय इस बात का विशेष ध्यान रखें कि शिशु के शरीर से कपड़े हटा देवें ताकि शरीर को आसानी से धूप लग सकें।

मालिश अवश्य करें:- शिशु के शरीर को फिट और तन्दुरस्त रखने के लिए रोजाना 10 से 15 तक मालिश अवश्य करें। मालिश करने से शिशु की मांसपेशियां और हड्डियां मजबूत होती है। मालिश करते समय इस बात का विशेष ध्यान रखना है कि खाने और मालिश के बीच में कम से कम एक घंटे का अन्तराल होना चाहिए। अगर भोजन या स्तनपान के तुरंत बाद मालिश करते है तो उलटी होने की सम्भावना अधिक रहेगी। 

दूसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि नहलाने के तुरंत बाद मालिश नहीं करनी है।  नहलाने के 20 मिनट बाद ही मालिश शुरू करें। नहलाने के बाद शिशु के शरीर का तापमान कम हो जाता है जिसके कारण जुकाम होने का खतरा रहता है। 

मालिश हमेशा नीचे से ऊपर की ओर करें।  पैरों के तलवे और हाथों की हथेली से मालिश शुरू करके ऊपर की ओर सीने की तरफ करना है, जिससे खून का दौरा हृदय की तरफ होता रहें। 

हीटर का उपयोग सावधानीपूर्वक करें:- हीटर का उपयोग बच्चे के पास बिल्कुल ना करें, इससे स्किन जलने का खतरा रहता है। शिशु के कमरे में ऑयल वाले हीटर का इस्तेमाल करें। अगर हम साधारण हीटर का इस्तेमाल करते है तो कमरे की आद्रता के साथ-साथ ऑक्सीजन लेवल भी कम होता है। ऑयल वाले हीटर कमरें की आद्रता खत्म नहीं करते है, लेकिन इन्हें लगातार नहीं चलाना है 1-2 घंटे बाद हीटर को बंद कर दें। शिशु को कमरे से बाहर ले जाने का कार्यक्रम है तो कम से कम 20 मिनट पहले हीटर को बंद कर देवें। ऐसा करने से शिशु आसानी ससे बाहर के तापमान के साथ सामंजस्य बिठा सकता है।

नवजात शिशुओं के लिए यह पहला अनुभव होता है, इसलिए सर्दी के मौसम में अपने नौनिहाल शिशु के लिए विशेष एहतियात बरतने की आवश्यकता होती है। अगर शिशु को किसी भी प्रकार की दिक्कत हो रहीं हैं तो तुरंत अपने शिशु रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेवें। हमारे द्वारा दी गई जानकारी से आप संतुष्ट है तो इसे शेयर करें और आपकी राय कमेंट बॉक्स में जरुर देवें।