Epilepsy क्या है?

Epilepsy क्या है?

यह एक तरह का न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है, जिसमें मरीज के दिमाग में असामान्य तरंगें पैदा होने लगती हैं। यह कुछ वैसा ही है जैसे कि शॉर्ट सर्किट में दो तारों के बीच गलत दिशा में तेज करंट दौड़ता है। इसमें मरीज को झटके-से महसूस होते हैं, वह जमीन पर गिर जाता है, दांत भिंच जाते हैं, मुह से झाग निकलने लग जाते है, आँखे ऊपर की ओर स्थायी कर लेता है और वह कुछ देर के लिए बेहोश हो जाता है। यह बीमारी बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक को मिर्गी हो सकती है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार पूरी दुनिया में 5 करोड़ लोग मिर्गी से पीड़ित हैं।

Epilepsy के क्या कारण है ?

बेहद तनाव 
दवा सही समय पर नही लेना या छुट जाना  
कम नींद लेना 
हॉर्मोंस में बदलाव 
ज्यादा शराब पीना या अन्य नशीले पदार्थ का सेवन करना 
ब्लड शुगर का गिर जाना 
ब्लड प्रेशर का कम हो जाना 
बेहद तेज रोशनी में आना 
इसके अलावा और भी कई कारण है जिसकी वजह से यह बीमारी हो सकती है

 

जनेटिक: जीन्स में कोई गड़बड़ी हो, ब्रेन की नर्व्स ठीक से कम नहीं कर रही हों। 
इन्फेक्शन: जन्म के वक्त बच्चे को पीलिया हो गया हो या फिर किसी और इन्फेक्शन से ब्रेन को पूरी ऑक्सिजन न मिली हो। 
सिर पर गंभीर चोट:  किसी हादसे में सिर पर चोट लगी हो। 
स्ट्रोक या ब्रेन ट्यूमर: ब्रेन स्ट्रोक या ट्यूमर की समस्या हो। 
गर्भ में चोट: अगर मां के गर्भ में बच्चे को चोट लग गई हो। 
ऑटिजम होना: ऑटिजम की वजह से भी बच्चों में मिर्गी का दौरा संभव है। 
बढ़ती उम्र: उम्र बढ़ने पर अगर दिमाग सुस्त पड़ गया हो। 

दिमाग में टेपवर्म: न्यूरोसाइटिसरकोसिस (NCC) यानी दिमाग में टेपवर्म (कीड़ा) चला गया हो। 

ब्रेन टीबी: अगर दिमाग की टीबी हो गई हो या फिर कैल्शियम और सोडियम की कमी से भी छोटे बच्चों में दौरा पड़ सकता है। 

Epilepsy (मिर्गी) के कई प्रकार होते है:-

आमतौर मिर्गी को हम तीन से चार श्रेणियों में विभक्त कर सकते है-

साधारण मिर्गी : इसमें पूरे दिमाग में करंट फैलता है और मरीज बेहोश हो जाता है। यह सब मरीजों में  कॉमन होता है। 

Partial (focal) Epilepsy: इसमे शरीर के किसी एक हिस्से हलचल (असाधारण गतिविधि) होने लगती है और वह उसी हिस्से में रहता है, जैसे- आंख में, हाथ व पैर का MOVEMENT या बहकी-बहकी बाते करना। 

Absence Seizures: इसमें मरीज कोई हरकत नहीं करता। गुमसुम बैठा रहता है। हाथ हिलने लगता या मुंह हिलाने लगता है लेकिन बात नहीं करता।

Complex Partial Seizures: इसके लक्षण भी कुछ हद तक Absence Seizures की तरह ही होते हैं। 

Epilepsy (मिर्गी) में क्या-क्या सावधानी रखनी चाहिए:-

 -मिर्गी की दवा हमेशा सही वक्त पर लें तथा इन दवाईयों को बच्चों की पहुँच से दूर रखें। 
– रोजाना पर्याप्त (7-8 घंटे ) नींद लें और किसी भी तरह का तनाव न रखें I  
– हरी सब्जियों तथा फलों का भरपूर मात्रा में सेवन करे। ड्राइ-फ्रूट्स खाएं और डाइटिंग बिल्कुल न करें। 
– जो मिर्गी का मरीज वह ड्राइविंग बिल्कुल न करें। 
– तैराकी से दूर रहे तथा न ही बाथटब में नहाएं। 
– ऊंची जगहों पर न जाएं या कम-से-कम ऐसी जगहों पर न खड़े हों, जहां से गिरने का डर हो। 
– एडवेंचर स्पोर्ट्स (डाइविंग, स्कूबा डाइविंग, पैराग्लाइडिंग आदि) में हिस्सा न लें। 
– अगर मिर्गी का मरीज अकेले ही घर से बाहर कही घूमने जाये तो एक पर्ची पर अपना नाम, नंबर, घरवालों का नंबर और अन्य जरूरी जानकारी लिखकर अपने पर्स या जेब में रखें, जिससे किसी भी प्रकार की अनहोनी से बचा जा सके I  

इसके अलावा घरवालों को भी कई बातों का ध्यान रखना चाहिए जैसे :- 

– मरीज के साथ नॉर्मल तरीके से बर्ताव करें। मरीज के साथ ऐसी बात नही करे जिससे वो टेंशन करने लगे I 
– घर में लगे फर्नीचर को सुव्यवस्थित करे, जिस फर्नीचर के कोने तीखे हो या फिर धक्का लगाने से आसानी से गिर जाये, उसके लिए अलग से प्रबंध करेI  – घर में खुले में आग न जलाएं और  न ही ज्वलनशील वस्तुओं का प्रयोग करे। 
– घर में मिडाज़ोलम (Midazolam) नेज़ल स्प्रे रखें। दौरा पड़ने पर मरीज की नाक में इसे स्प्रे करने से वह जल्दी होश में आ जाता है। 
– मरीज अगर बच्चा है और वह स्कूल जाता है तो स्कूल प्रबन्धक को इसके बारे जरुर सूचना दें और बताएं कि दौरा आने की हालत में उन्हें क्या करना है। 

मिर्गी का दौरा आ जाये तो क्या करना है ?

– अगर मरीज ने टाइट कपड़े पहन रखे है तो उनको तुरंत ढीला कर दें। 
– भयभीत न हों, न ही घबराए, शांति और सयंम से रखे तथा शोर-शराबा बिल्कुल न करे। 
– मरीज को करवट से लिटा दें ताकि थूक या अन्य पदार्थ गले में जाकर अटके नही । 
– उसके आसपास भीड़ न करे । हवा आने दें। 
– मरीज के हाथ-पैरों की मालिश न करें, न ही उसे चप्पल आदि सुंघाएं। 
– उसके शरीर के अकड़े हुए अंगों को जबरन सीधा करने की कोशिश न करें। 
– न ही उसके मुंह में चम्मच डालें। चम्मच डालने से दांत टूट सकता है और गले में फंसकर जानलेवा साबित हो सकता है। उसके मुंह में कुछ भी न डालें। 
– मरीज को न कुछ पिलाएं, न ही कुछ खिलाने की कोशिश करें। 
– 5-6 मिनट में मरीज होश में ना आए तो डॉक्टर के पास ले जाएं क्योंकि अगर उसी अवस्था में दोबारा दौरा पड़ गया तो घातक हो सकता है। 

नोट: अगर पहले से दवा चल रही हैं उसके बावजूद भी मिर्गी का दौरा आ रहा है तो दवा तथा पुरानी जाँच जो भी हो दौरा पड़ने पर डॉक्टर को जरुर दिखाए ताकि जरूरी लगने पर डॉक्टर दवा बदल सके और उचित इलाज शुरू कर सके I