संयुक्त परिवार की वर्तमान समय में प्रासंगिकता क्यों है ?

संयुक्त परिवार की वर्तमान समय में प्रासंगिकता क्यों है ?

संयुक्त परिवार की वर्तमान समय में प्रासंगिकता क्यों है ?

जिस तरह वर्तमान समय में हमारी सामाजिक जीवनशैली तेजी से बदल रही है, घर परिवार सिमटते जा रहे है I केरियर की खातिर आजकल के युवक-युवतिया अधिक उम्र में शादी करते है और जॉब के लिए अपने परिवार से दूर चले जाते है I इसका सबसे ज्यदा असर उनके बच्चों पर पड़ता है, बच्चे घर पर अकेले नौकर के भरोसे रहते है I बच्चे यह जान नही पाते है कि परिवार क्या होता है, सामाजिक मूल्य क्या होता है, आपसी मेलजोल क्या होता है ? इस जीवनशैली के कारण बच्चे उन लोगों के सम्पर्क में आ जाते है जो आपराधिक प्रवृति से जुड़े हुए होते है और अपने आप को अपराध के दलदल में धकेल देते है I आए दिन हम समाचार पत्र, टीवी पर देखते है कि नाबालिंग को मर्डर, बलात्कार, डकैती इत्यादि के आरोप में गिरफ्तार किया है, अगर हम इनका विश्लेषण करे तो यह ही निकलकर आता है कि बच्चों में अच्छे संस्कारो का विकास ही नही हुआ I अच्छी शिक्षा, अच्छे संस्कार एकल परिवार से विकसित नही होते है इसके लिए हमें सयुक्त परिवार की भूमिका को फिर से समझना पड़ेगा I इसलिए आज हमें अपनी खोई हुई विरासत और सांस्कारिक मूल्यों के लिए संयुक्त परिवार की आवश्यकता है, क्योंकि संयुक्त परिवार ही हमें प्रेम, सौहार्द और एक-दूसरे से जोड़कर रखता है I 

संयुक्त परिवार क्या है ?

एक ही परिवार में जब कई पीढ़ी के सदस्य आपस में मिलजुल कर रहते है जैसे दादा-दादी, माता-पिता, चाचा-चाची और उनके बच्चे इन सबको को मिलाकर संयुक्त परिवार कहते है I एक संयुक्त परिवार एक अविभाज्य परिवार होता है। कई सदस्य संयुक्त परिवार में एक साथ रहते हैं, जहाँ एक पीढ़ी एक साधारण घर में एक साथ रहती है।

संयुक्त परिवार में रहने के फायदे ?

  1. आपसी तालमेल :- संयुक्त परिवार से सदस्यों में आपसी तालमेल और सामंजस्य का भाव रहता है जिसके कारण वे परस्पर एक-दूसरे का सम्मान करते है I
  2. अनुशासन में सहायक :- संयुक्त परिवार में परिवार के मुखिया द्वारा नीति निर्धारण किया जाता है और परिवार के समस्त सदस्यों द्वारा अनुसरण किया जाता है जिससे अनुशासन की भावना का विकास होता है I
  3. आपराधिक प्रवृति पर रोक :- एकल परिवार में जब माता-पिता काम के लिए घर से बाहर जाते है तो बच्चे घर पर अकेले ही रह जाते है और एकांत जीवन में बच्चे घर पर टीवी या मोबाइल से आपराधिक प्रवृति या संस्कारहीन विडियो देखते है, जिसके कारण बच्चों की मनोदशा बदल जाती है तथा अपराध की ओर अग्रसर हो जाते है I परन्तु संयुक्त परिवार में दादा-दादी या अन्य बड़े व्यक्ति घर पर रहते है जो बच्चों को सही शिक्षा और संस्कार देते है जिससे आपराधिक प्रवृति पर रोक लगती है I
  4. जिम्मेदारियों का निर्वहन :- संयुक्त परिवार में प्रत्येक वयस्क सदस्य के लिए अलग-अलग कार्य होता है जिनका वो उचित तरीके से निष्पादन करते है और परस्पर एक-दूसरे का सम्मान करते है जिससे अपनी जिम्मेदारी के प्रति निष्ठा बढ़ती है I
  5. उचित मार्गदर्शन :- संयुक्त परिवार में बड़े बुजर्ग अपना अनुभव छोटे सदस्यों के साथ शेयर करते है तथा विपरीत परिस्थितियों में उचित मार्गदर्शन देते है जिससे किसी भी प्रकार की समस्या का मुकाबला किया जा सके I
  6. निस्वार्थताका भाव :- संयुक्त परिवार में सदस्य एक-दूसरे के प्रति प्रतिबद्ध रहते है जिससे निस्वार्थता का भाव जाग्रत होता है I

निष्कर्ष :अब वक्त आ गया है कि हमें फिर से संयुक्त परिवार की उपयोगिता को समझना होगा एवं इसका चलन अपनाना होगा, क्योंकि संयुक्त परिवार से ही हम अपनी खोई हुई सामाजिक धरोहर और संस्कार को फिर से जीवट कर सकते है I